900 करोड़ रुपए का बड़ा घोटाला संजीवन सोसायटी मे!

 

 हाईकोर्ट राजस्थान ने संजीवनी क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसायटी में हुए 900 करोड़ रुपए के घोटाले के मामले में अब तक हुई जांच प्रगति की पूरी फैक्चुअल रिपोर्ट मांगी है। जस्टिस मनोज कुमार गर्ग की एकल पीठ ने यह आदेश सोसायटी के खिलाफ फौजदारी विधिक याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया। संजीवनी क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसायटी घोटाले के मामले में केंद्रीय जलशक्ति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत का नाम भी उछल रहा है। इससे जुड़े एक अन्य मामले में हाईकोर्ट उन्हें पहले ही नोटिस जारी कर चुका है।

जोधपुर की बीजेएस कॉलोनी निवासी नरेंद्र सिंह राठौड़ की ओर से अधिवक्ता प्रवीण दयाल दवे ने एकलपीठ फौजदारी विविध याचिका प्रस्तुत कर न्यायालय को बताया कि नरेंद्र सिंह ने संजीवनी क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसायटी लिमिटेड में एक लाख रुपए की एफडी 20 जनवरी 2017 को करवाई, जिसकी कुल परिपक्वता राशि डेढ़ लाख रुपए थी। एफडी करवाने के समय सोसायटी की तरफ से अत्यधिक धन लाभ का प्रलोभन दिया गया। लेकिन परिपक्वता होने पर राशि नहीं लौटाई गई। बाद में पता चला कि सोसायटी के कर्ताधर्ताओं ने करोड़ों रुपए का घोटाला किया है।

इसके बाद पुलिस कमिश्नर जोधपुर को परिवाद देने पर भी एफआईआर दर्ज नही की गई, तब परिवादी ने महानगर न्यायिक मजिस्ट्रेट जोधपुर के समक्ष विक्रम सिंह, मुख्य प्रबंधक, डायरेक्टर, संस्थापक सदस्य सहित अन्य के विरूद्ध प्रस्तुत किया। जिसे न्यायालय द्वारा 156(3) crpc मे महामंदिर थाना में भिजवा दिया गया, जिसके 61 दिन गुजरने के बाद 19 अक्टूबर 2020 को पुलिस ने एफआईआर दर्ज की। एफआईआर दर्ज दर्ज होने के बावजूद पुलिस द्वारा कोई कार्रवाई ना करने पर राजस्थान उच्च न्यायालय जोधपुर में आपराधिक विविध याचिका प्रस्तुत की गई। जिस पर जस्टिस मनोज कुमार गर्ग सुनवाई करते हुए पूरे मामले की फैक्चुअल रिपोर्ट तलब की है।

 🔴क्या है पूरा मामला

संजीवनी क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी को राजस्थान सोसाइटी एक्ट के तहत 2008 में रजिस्टर्ड कराया गया था। इसके बाद 2010 में ये सोसायटी मल्टी स्टेट कोऑपरेटिव सोसायटी के रूप में बदल गई। संजीवनी क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसायटी ने लोगों को भारी प्रलोभन देकर बड़ी संख्या में निवेश कराया गया। निवेशकों को कई तरह के सब्जबाग दिखाए गए। हजारों लोगों लोगों ने कुल मिलाकर करोड़ों रुपए का सोसायटी में निवेश किया। लेकिन उनकी राशि वापस लौटाई नहीं गई।

बाद में लोगों की शिकायत पर यह मामला एसओजी तक पहुंचा। पिछले साल अगस्त में एफआईआर दर्ज की गई। जांच होने पर कुल घोटाला 900 करोड़ रुपए से भी अधिक का निकला। आरोप ये भी हैं कि निवेशकों के पैसे को गलत तरीके से अपने चहेतों और फर्जी कंपनियां गठित कर उनके नाम पर लोन पर दिया गया और लोन पर ब्याज भी नहीं वसूला गया। जांच के दौरान कई और गड़बड़ियां उजागर हुईं। सोसाइटी के अधिकारियों की गिरफ्तारियां भी की गईं। इनमें सोसाइटी के मैनेजिंग डायरेक्टर विक्रम सिंह का नाम प्रमुख था और उन्हें ही मास्टर माइंड माना गया। उनकी भी इस मामले में गिरफ्तारी हो चुकी है।

🔴गजेंद्र सिंह शेखावत का नाम  भी है चर्चा में

इस घोटाले के सामने आने के बाद से केन्द्रीय जलशक्ति मंत्री और जोधपुर के सांसद गजेन्द्र सिंह शेखावत भी चर्चा में है। शेखावत व विक्रम सिंह पहले बिजनेस पार्टनर रह चुके हैं। विक्रम सिंह के खातों से शेखावत व उनके परिजनों के बैंक खातों में लाखों रुपए का लेनदेन भी हुआ। सांसद बनने से पहले शेखावत ने विक्रम सिंह के साथ अपनी पार्टनरशिप को समाप्त कर लिया था। इस कारण इस घोटाले में उनका नाम गाहे-बगाहे चर्चा में आ जाता है। जयपुर की एक अदालत ने इस मामले में शेखावत की भूमिका की जांच के आदेश भी दिए थे। लेकिन हाईकोर्ट ने इस मामले में जांच पर रोक लगाते हुए उन्हें राहत पहुंचाई। लेकिन अब संजीवनी पीड़ित संघ की तरफ से हाई कोर्ट में याचिका लगाई गई। इस पर सुनवाई करते हुए इस मामले से जुड़े अन्य सभी पक्षों सहित गजेंद्र सिंह शेखावत व उनकी पत्नी को भी नोटिस जारी किया है।अब देखना है क्या कारवाई होती है! 

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